श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 195-196h
 
 
श्लोक  12.138.195-196h 
तस्मात् सर्वास्ववस्थासु रक्षेज्जीवितमात्मन:॥ १९५॥
द्रव्याणि संततिश्चैव सर्वं भवति जीवित:।
 
 
अनुवाद
इसलिए मनुष्य को हर हाल में अपने प्राणों की रक्षा करनी चाहिए; क्योंकि यदि वह जीवित रहेगा तो उसे धन, पुत्र-सब कुछ प्राप्त होगा।'
 
‘Therefore one must protect his life in all circumstances; because if one is alive, one gets wealth and children - everything. 195 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)