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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 190-191h
श्लोक
12.138.190-191h
इति संस्तूयमानोऽपि मार्जारेण स मूषिक:॥ १९०॥
मनसा भावगम्भीरो मार्जारं वाक्यमब्रवीत् ।
अनुवाद
बिल्ली द्वारा इस प्रकार स्तुति करने पर भी चूहा मन ही मन गंभीर रहा और उसने पुनः बिल्ली से इस प्रकार कहा-॥190 1/2॥
Even after being praised in this manner by the cat, the mouse remained serious in his heart. He again said to the cat in this manner-॥190 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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