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mahabharat 12.138.183-184: जब पालित ने उसे इस स्पष्ट और कठोर तरीके से डांटा, तो बिल्ली को शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने चूहे से निम्नलिखित कहा। 183-184   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 183-184
 
 
श्लोक  12.138.183-184 
इत्यभिव्यक्तमेवं स पलितेनाभिभर्त्सित:॥ १८३॥
मार्जारो व्रीडितो भूत्वा मूषिकं वाक्यमब्रवीत् ॥ १८४॥
 
 
अनुवाद
जब पालित ने उसे इस स्पष्ट और कठोर तरीके से डांटा, तो बिल्ली को शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने चूहे से निम्नलिखित कहा। 183-184
 
When Palit rebuked him in this clear and stern manner, the cat felt ashamed and said the following to the mouse. 183-184
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)