Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.182-183h: जो दुर्बल प्राणी अपने बलवान शत्रुओं को भलीभाँति जानते हैं, उनकी शास्त्रार्थ के अर्थ के ज्ञान से स्थित हुई बुद्धि कभी विचलित नहीं होती। 182 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रून् सम्यग् विजानन्ति दुर्बला ये बलीयस:॥ १८२॥
न तेषां चाल्यते बुद्धि: शास्त्रार्थकृतनिश्चया।
अनुवाद
जो दुर्बल प्राणी अपने बलवान शत्रुओं को भलीभाँति जानते हैं, उनकी शास्त्रार्थ के अर्थ के ज्ञान से स्थित हुई बुद्धि कभी विचलित नहीं होती। 182 1/2॥
‘Those weak creatures who know their strong enemies very well, their intellect, which is established by the knowledge of the meaning of the scriptures, never gets disturbed.’ 182 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥