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mahabharat 12.138.181-182h: जो लोग अपनी रक्षा करने के लिए तैयार रहते हैं और सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद कार्य करते हैं, उन्हें अपनी गलतियों के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 181-182h
 
 
श्लोक  12.138.181-182h 
आत्मरक्षणतन्त्राणां सुपरीक्षितकारिणाम्॥ १८१॥
आपदो नोपपद्यन्ते पुरुषाणां स्वदोषजा:।
 
 
अनुवाद
जो लोग अपनी रक्षा करने के लिए तैयार रहते हैं और सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद कार्य करते हैं, उन्हें अपनी गलतियों के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।
 
'Those who are prepared to defend themselves and act after careful consideration do not face any troubles arising out of their own faults.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)