Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.178-179h: मैं तुम्हें जो कुछ भी चाहिए, दे सकता हूँ; परन्तु मैं अपने आपको कभी नहीं दूँगा। अपनी रक्षा के लिए पुत्र, राज्य, रत्न और धन-सब कुछ त्याग दिया जा सकता है। सब कुछ त्यागकर भी अपनी रक्षा करनी चाहिए॥178 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं तुम्हें जो कुछ भी चाहिए, दे सकता हूँ; परन्तु मैं अपने आपको कभी नहीं दूँगा। अपनी रक्षा के लिए पुत्र, राज्य, रत्न और धन-सब कुछ त्याग दिया जा सकता है। सब कुछ त्यागकर भी अपनी रक्षा करनी चाहिए॥178 1/2॥
‘I can give you anything you want; but I will never give myself. To protect oneself, one can sacrifice children, kingdom, jewels and wealth – everything. One must protect oneself even after sacrificing everything.॥ 178 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥