Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.174-175: तुम्हारा कल्याण हो। मैं अब चला जाता हूँ। मुझे तुमसे दूर से भी डर लगता है। चाहे मैं आस्था से भाग रहा हूँ या लापरवाही से, इस समय यही मेरा कर्तव्य है। किसी कमज़ोर व्यक्ति का बलवान के पास रहना कभी अच्छा नहीं माना जाता। | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वस्ति तेऽस्तु गमिष्यामि दूरादपि तवोद्विजे॥ १७४॥
विश्वस्तं वा प्रमत्तं वा एतदेव कृतं भवेत्।
बलवत्संनिकर्षो हि न कदाचित् प्रशस्यते॥ १७५॥
अनुवाद
तुम्हारा कल्याण हो। मैं अब चला जाता हूँ। मुझे तुमसे दूर से भी डर लगता है। चाहे मैं आस्था से भाग रहा हूँ या लापरवाही से, इस समय यही मेरा कर्तव्य है। किसी कमज़ोर व्यक्ति का बलवान के पास रहना कभी अच्छा नहीं माना जाता।
May you be blessed. I will leave now. I am afraid of you even from a distance. Whether I am fleeing with faith or due to negligence, this is my duty at this time. It is never considered good for a weak person to stay near the strong.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥