श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 172-173h
 
 
श्लोक  12.138.172-173h 
नाहं त्वया समेष्यामि वृत्तो हेतु: समागमे॥ १७२॥
शिवं ध्यायस्व मे स्वस्थ: सुकृतं स्मरसे यदि।
 
 
अनुवाद
अब मैं तुमसे नहीं मिलूँगा। हमारे मिलने का उद्देश्य पूरा हो गया। यदि तुम मेरे उपकारों का स्मरण करते हो, तो स्वयं भी स्वस्थ रहो और मेरे कल्याण का भी विचार करो॥172 1/2॥
 
‘Now I will not meet you. The purpose of our meeting has been fulfilled. If you remember my good deeds (favors) then stay healthy yourself and think about my welfare too.॥ 172 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)