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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 170-171h
श्लोक
12.138.170-171h
त्वं चापि पुत्रदारस्थो यत् संधिं सृजसे मयि॥ १७०॥
शुश्रूषां यतसे कर्तुं सखे मम न तत् क्षमम्।
अनुवाद
‘मित्र! तुम बच्चों के बीच बैठकर मेरे साथ शांति का दिखावा करके मेरी सेवा करने की कोशिश कर रहे हो, यह सब मेरे योग्य नहीं है॥170 1/2॥
‘Friend! You are sitting amidst children and trying to serve me by pretending to be at peace with me, all that is not worthy of me.॥ 170 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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