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mahabharat 12.138.167-168h: "मैं तुम्हारे विचार समझ गया हूँ। निश्चय ही, जब से तुम जाल से मुक्त हुए हो, तब से तुम सरल तरीकों से और बड़ी मेहनत से भोजन की खोज कर रहे होगे।" 167 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 167-168h
 
 
श्लोक  12.138.167-168h 
स मन्येऽहं तव प्रज्ञां यन्मोक्षात् प्रत्यनन्तरम्॥ १६७॥
भक्ष्यं मृगयसे नूनं सुखोपायेन कर्मणा।
 
 
अनुवाद
"मैं तुम्हारे विचार समझ गया हूँ। निश्चय ही, जब से तुम जाल से मुक्त हुए हो, तब से तुम सरल तरीकों से और बड़ी मेहनत से भोजन की खोज कर रहे होगे।" 167 1/2
 
"I have understood your thoughts. Surely, ever since you were freed from the net, you have been searching for food by easy means and with great effort. 167 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)