श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 166-167h
 
 
श्लोक  12.138.166-167h 
अहमन्नं भवान् भोक्ता दुर्बलोऽहं भवान् बली॥ १६६॥
नावयोर्विद्यते संधिर्वियुक्ते विषमे बले।
 
 
अनुवाद
मैं अन्न हूँ और तुम मुझे खाने वाले हो। मैं दुर्बल हूँ और तुम बलवान हो। इस प्रकार मेरे और तुम्हारे बल में कोई समानता नहीं है। दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। इसलिए हमारे बीच कोई संधि नहीं हो सकती।॥166 1/2॥
 
'I am food and you are the one who eats me. I am weak and you are strong. Thus there is no similarity between my and your strength. There is a huge difference between the two. Hence there can be no treaty between us.॥ 166 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)