श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 164-165h
 
 
श्लोक  12.138.164-165h 
त्वद्वीर्येण प्रमुक्तोऽहं मद्वीर्येण तथा भवान्॥ १६४॥
अन्योन्यानुग्रहे वृत्ते नास्ति भूय: समागम:।
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हारे पराक्रम से और तुम मेरे पराक्रम से अपने प्राणों के संकट से मुक्त हो गए। जब ​​एक-दूसरे पर उपकार करने का कार्य पूरा हो जाए, तो हमें फिर एक-दूसरे से मिलने की आवश्यकता नहीं रहती।' 164 1/2
 
‘I was freed from the danger to my life by your might and you by my strength. When the work of showing favour to each other is completed, then there is no need for us to meet each other again. 164 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)