Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.164-165h: मैं तुम्हारे पराक्रम से और तुम मेरे पराक्रम से अपने प्राणों के संकट से मुक्त हो गए। जब एक-दूसरे पर उपकार करने का कार्य पूरा हो जाए, तो हमें फिर एक-दूसरे से मिलने की आवश्यकता नहीं रहती।' 164 1/2 | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं तुम्हारे पराक्रम से और तुम मेरे पराक्रम से अपने प्राणों के संकट से मुक्त हो गए। जब एक-दूसरे पर उपकार करने का कार्य पूरा हो जाए, तो हमें फिर एक-दूसरे से मिलने की आवश्यकता नहीं रहती।' 164 1/2
‘I was freed from the danger to my life by your might and you by my strength. When the work of showing favour to each other is completed, then there is no need for us to meet each other again. 164 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥