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mahabharat 12.138.163-164h: शुक्र आदि विद्वानों द्वारा प्रतिपादित नीति के सिद्धांतों को भली-भाँति जानने पर भी मैं आपके लिए उस जाल में कैसे फँस गया? यह आप ही मुझे बताइए॥163 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 163-164h
 
 
श्लोक  12.138.163-164h 
सोऽहमेवं प्रणीतानि ज्ञात्वा शास्त्राणि तत्त्वत:॥ १६३॥
प्रविशेयं कथं पाशं त्वत्कृते तद् वदस्व मे।
 
 
अनुवाद
शुक्र आदि विद्वानों द्वारा प्रतिपादित नीति के सिद्धांतों को भली-भाँति जानने पर भी मैं आपके लिए उस जाल में कैसे फँस गया? यह आप ही मुझे बताइए॥163 1/2॥
 
‘How could I have entered that trap for you, even after knowing so well the principles of ethics formulated by Shukra and other scholars? You tell me this.॥ 163 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)