त्वं हि मे जातित: शत्रु: सामर्थ्यान्मित्रतां गत:॥ १६२॥
तत् कृत्यमभिनिर्वर्त्य प्रकृति: शत्रुतां गता।
अनुवाद
‘तुम जाति से मेरे शत्रु हो, परन्तु किसी विशेष प्रयोजन से तुम मेरे मित्र बने थे। उस प्रयोजन की सिद्धि के पश्चात् तुम्हारा स्वभाव पुनः वैर-भाव से हो गया । 162 1/2॥
‘You are my enemy by caste, but you became my friend for a special purpose. After achieving that purpose, your nature again became innately hostile. 162 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)