Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.162-163h: ‘तुम जाति से मेरे शत्रु हो, परन्तु किसी विशेष प्रयोजन से तुम मेरे मित्र बने थे। उस प्रयोजन की सिद्धि के पश्चात् तुम्हारा स्वभाव पुनः वैर-भाव से हो गया । 162 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वं हि मे जातित: शत्रु: सामर्थ्यान्मित्रतां गत:॥ १६२॥
तत् कृत्यमभिनिर्वर्त्य प्रकृति: शत्रुतां गता।
अनुवाद
‘तुम जाति से मेरे शत्रु हो, परन्तु किसी विशेष प्रयोजन से तुम मेरे मित्र बने थे। उस प्रयोजन की सिद्धि के पश्चात् तुम्हारा स्वभाव पुनः वैर-भाव से हो गया । 162 1/2॥
‘You are my enemy by caste, but you became my friend for a special purpose. After achieving that purpose, your nature again became innately hostile. 162 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥