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mahabharat 12.138.161-162h: "पहले, जब कोई उचित कारण होता था, तो हम दोस्त बन जाते थे। लेकिन जब समय द्वारा प्रस्तुत कारण लुप्त हो जाता था, तो वह मित्रता भी लुप्त हो जाती थी।" 161 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 161-162h
 
 
श्लोक  12.138.161-162h 
आसीन्मैत्री तु तावन्नौ यावद्धेतुरभूत् पुरा॥ १६१॥
सा गता सह तेनैव कालयुक्तेन हेतुना।
 
 
अनुवाद
"पहले, जब कोई उचित कारण होता था, तो हम दोस्त बन जाते थे। लेकिन जब समय द्वारा प्रस्तुत कारण लुप्त हो जाता था, तो वह मित्रता भी लुप्त हो जाती थी।" 161 1/2
 
"Earlier, when there was a suitable reason, we had become friends. But when the reason presented by time disappeared, that friendship also vanished." 161 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)