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यो ह्यमित्रैर्नरो नित्यं न संदध्यादपण्डित:।
न सोऽर्थं प्राप्नुयात् किंचित् फलान्यपि च भारत॥ १६॥
अनुवाद
भारत! जो मूर्ख मनुष्य किसी भी परिस्थिति में अपने शत्रुओं के साथ संधि नहीं करता, वह न तो अपने किसी उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है और न ही कोई फल प्राप्त कर सकता है॥16॥
Bharat! A foolish person who never enters into a treaty with his enemies under any circumstances, can neither achieve any of his goals nor get any fruit.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥