श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.138.16 
यो ह्यमित्रैर्नरो नित्यं न संदध्यादपण्डित:।
न सोऽर्थं प्राप्नुयात् किंचित् फलान्यपि च भारत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भारत! जो मूर्ख मनुष्य किसी भी परिस्थिति में अपने शत्रुओं के साथ संधि नहीं करता, वह न तो अपने किसी उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है और न ही कोई फल प्राप्त कर सकता है॥16॥
 
Bharat! A foolish person who never enters into a treaty with his enemies under any circumstances, can neither achieve any of his goals nor get any fruit.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)