Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.153-154h: कभी-कभी भाई भी किसी स्वार्थवश क्रोधित हो जाते हैं अथवा पत्नी भी रुष्ट हो जाती है। यद्यपि वे स्वभावतः ही एक-दूसरे से ऐसा प्रेम करते हैं जैसा कोई दूसरा उनसे नहीं करता॥153 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि भ्रातर: क्रुद्धा भार्या वा कारणान्तरे॥ १५३॥
स्वभावतस्ते प्रीयन्ते नेतर: प्रीयते जन:।
अनुवाद
कभी-कभी भाई भी किसी स्वार्थवश क्रोधित हो जाते हैं अथवा पत्नी भी रुष्ट हो जाती है। यद्यपि वे स्वभावतः ही एक-दूसरे से ऐसा प्रेम करते हैं जैसा कोई दूसरा उनसे नहीं करता॥153 1/2॥
‘Sometimes brothers also get angry due to some selfish motive or the wife also gets upset. Although they naturally love each other in a way that no other person loves them.॥ 153 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥