Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.152-153h: यह जीव जगत स्वार्थ का साथी है। कोई किसी का प्रिय नहीं है। यहाँ तक कि दो सगे भाइयों और पति-पत्नी के बीच का प्रेम भी स्वार्थ पर आधारित है। मैं इस संसार में किसी के प्रेम को अकारण (स्वार्थपूर्ण) नहीं मानता।॥152 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह जीव जगत स्वार्थ का साथी है। कोई किसी का प्रिय नहीं है। यहाँ तक कि दो सगे भाइयों और पति-पत्नी के बीच का प्रेम भी स्वार्थ पर आधारित है। मैं इस संसार में किसी के प्रेम को अकारण (स्वार्थपूर्ण) नहीं मानता।॥152 1/2॥
‘This living world is a companion of selfishness. No one is dear to anyone. Even the love between two real brothers and husband and wife is also based on selfishness. I do not consider anyone's love in this world to be without reason (selfish).॥ 152 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥