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mahabharat 12.138.149-150h: चंचल मनुष्य जब अपना ही कल्याण नहीं करता, तो दूसरों का कल्याण कैसे करेगा? अतः यह निश्चित है कि चंचल मनुष्य सब कुछ बिगाड़ देता है॥149 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.149-150h 
आत्मनश्चपलो नास्ति कुतोऽन्येषां भविष्यति॥ १४९॥
तस्मात् सर्वाणि कार्याणि चपलो हन्त्यसंशयम्।
 
 
अनुवाद
चंचल मनुष्य जब अपना ही कल्याण नहीं करता, तो दूसरों का कल्याण कैसे करेगा? अतः यह निश्चित है कि चंचल मनुष्य सब कुछ बिगाड़ देता है॥149 1/2॥
 
‘When a fickle person is not good for himself, how will he do good for others? Therefore, it is certain that a fickle person spoils everything.॥ 149 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)