श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 148-149h
 
 
श्लोक  12.138.148-149h 
अस्मिन् निलय एव त्वं न्यग्रोधादवतारित:॥ १४८॥
पूर्वं निविष्टमुन्माथं चपलत्वान्न बुद्धवान्।
 
 
अनुवाद
तुम इसी स्थान पर बरगद के पेड़ से उतरे थे और जाल पहले से ही यहाँ बिछा हुआ था; लेकिन तुम्हारी चपलता के कारण तुमने इस पर ध्यान नहीं दिया और फँस गये।'
 
‘You had come down from the banyan tree at this very spot and the net was already laid here; but due to your agility you did not pay attention to it and got trapped. 148 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)