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mahabharat 12.138.145-146h: माता-पिता, पुत्र, मामा, भांजे, संबंधी और मित्र, इन सभी में प्रेम केवल स्वार्थपूर्ण संबंधों के कारण ही होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 145-146h
 
 
श्लोक  12.138.145-146h 
अर्थयुक्त्या हि जायन्ते पिता माता सुतस्तथा॥ १४५॥
मातुला भागिनेयाश्च तथा सम्बन्धिबान्धवा:।
 
 
अनुवाद
माता-पिता, पुत्र, मामा, भांजे, संबंधी और मित्र, इन सभी में प्रेम केवल स्वार्थपूर्ण संबंधों के कारण ही होता है।
 
‘Parents, sons, maternal uncles, nephews, relatives and friends, all of them have love only because of selfish relationships.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)