Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.144-145h: कभी भी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा न करें जो भरोसेमंद न हो और कभी भी ऐसे व्यक्ति पर बहुत अधिक भरोसा न करें जो भरोसेमंद हो क्योंकि विश्वास से पैदा हुआ डर व्यक्ति को पूरी तरह से नष्ट कर देता है। | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न विश्वसेदविश्वस्ते विश्वस्ते नातिविश्वसेत्॥ १४४॥
विश्वासाद् भयमुत्पन्नमपि मूलानि कृन्तति।
अनुवाद
कभी भी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा न करें जो भरोसेमंद न हो और कभी भी ऐसे व्यक्ति पर बहुत अधिक भरोसा न करें जो भरोसेमंद हो क्योंकि विश्वास से पैदा हुआ डर व्यक्ति को पूरी तरह से नष्ट कर देता है।
Never trust a person who is not trustworthy and never trust too much a person who is trustworthy because the fear born out of trust destroys a person completely.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥