श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  12.138.137 
वेदितव्यानि मित्राणि विज्ञेयाश्चापि शत्रव:।
एतत् सुसूक्ष्मं लोकेऽस्मिन् दृश्यते प्राज्ञ सम्मतम्॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
मित्रों को जानना चाहिए, शत्रुओं को भी भलीभाँति जानना चाहिए - इस संसार में मित्र और शत्रु की यह पहचान अत्यंत सूक्ष्म है और विद्वानों का मत है ॥137॥
 
'Friends should be known, enemies should also be well understood - this identification of friend and foe in this world is extremely subtle and is the opinion of the learned.॥ 137॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)