श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  12.138.135 
एवमुक्त: परां शान्तिं मार्जारेण स मूषिक:।
उवाच परमन्त्रज्ञ: श्लक्ष्णमात्महितं वच:॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
बिल्ली के मुख से ऐसे अत्यंत शांतिदायक वचन सुनकर चूहे ने उत्तम उपदेश जानकर मधुर वाणी में अपने लिए हितकर वचन कहे-॥135॥
 
Having heard such extremely peaceful words from the cat, the mouse, knowing the best advice, spoke words in a sweet voice that were beneficial to himself -॥ 135॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)