श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  12.138.133 
अमात्यो मे भव प्राज्ञ पितेवेह प्रशाधि माम्।
न तेऽस्ति भयमस्मत्तो जीवितेनात्मन: शपे॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
विद्वान्! आप मेरे मंत्री बन जाइए और पिता के समान मुझे मेरे कर्तव्यों का उपदेश दीजिए। मैं अपने प्राणों की शपथ खाकर कहता हूँ कि आपको हमसे किसी प्रकार का भय नहीं है॥133॥
 
'Vidwan! You become my minister and teach me about my duties like a father. I swear on my life that you have nothing to fear from us.॥ 133॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)