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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 132
श्लोक
12.138.132
ईश्वरो मे भवानस्तु स्वशरीरगृहस्य च।
अर्थानां चैव सर्वेषामनुशास्ता च मे भव॥ १३२॥
अनुवाद
तुम मेरे शरीर और मेरे घर के स्वामी हो जाओ। मेरी जो भी संपत्ति है, वह सब तुम्हारी है। तुम उसके शासक और प्रशासक बनो॥132॥
‘You become the master of my body and my house. Whatever property I have, it is all yours. You become its ruler and administrator.॥ 132॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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