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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 130
श्लोक
12.138.130
यानि मे सन्ति मित्राणि ये च सम्बन्धिबान्धवा:।
सर्वे त्वां पूजयिष्यन्ति शिष्या गुरुमिव प्रियम्॥ १३०॥
अनुवाद
मेरे सभी मित्र, सम्बन्धी और सुहृद आपकी उसी प्रकार सेवा और पूजा करेंगे जैसे शिष्य अपने पूज्य गुरु की सेवा करता है॥130॥
'All my friends, relatives and friends will serve and worship you in the same manner as a disciple serves his revered Guru.॥ 130॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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