Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.129: मित्र ! तुमने अपनी योग्यता के अनुसार मेरा आदर किया है और मैं भी तुम्हारा मित्र हो गया हूँ; अतः तुम मेरे साथ रहो और इस मित्रता का सुख भोगो ॥ 129॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्कृतोऽहं त्वया मित्र सामर्थ्यादात्मन: सखे।
स मां मित्रत्वमापन्नमुपभोक्तुं त्वमर्हसि॥ १२९॥
अनुवाद
मित्र ! तुमने अपनी योग्यता के अनुसार मेरा आदर किया है और मैं भी तुम्हारा मित्र हो गया हूँ; अतः तुम मेरे साथ रहो और इस मित्रता का सुख भोगो ॥ 129॥
'Friend! You have treated me with respect to the best of your ability and I have also become your friend; therefore you should stay with me and enjoy the happiness of this friendship.॥ 129॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥