श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  12.138.126 
अकृत्वा संविदं काञ्चित् सहसा समवप्लुत:।
कृतज्ञं कृतकर्माणं कच्चिन्मां नाभिशंकसे॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
भैया ! तुम मुझसे बिना कुछ कहे अचानक इस प्रकार गड्ढे में क्यों घुस गए ? मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ । मैंने तुम्हारे प्राण बचाकर तुम्हारा बहुत बड़ा उपकार किया है । क्या तुम्हें मुझ पर कोई संदेह है ?॥126॥
 
‘Bhaiya! Why did you suddenly enter the hole like this without talking to me? I am very grateful to you. I have done a great service to you by saving your life. Do you have any doubts about me?॥ 126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)