अकृत्वा संविदं काञ्चित् सहसा समवप्लुत:।
कृतज्ञं कृतकर्माणं कच्चिन्मां नाभिशंकसे॥ १२६॥
अनुवाद
भैया ! तुम मुझसे बिना कुछ कहे अचानक इस प्रकार गड्ढे में क्यों घुस गए ? मैं तुम्हारा बहुत आभारी हूँ । मैंने तुम्हारे प्राण बचाकर तुम्हारा बहुत बड़ा उपकार किया है । क्या तुम्हें मुझ पर कोई संदेह है ?॥126॥
‘Bhaiya! Why did you suddenly enter the hole like this without talking to me? I am very grateful to you. I have done a great service to you by saving your life. Do you have any doubts about me?॥ 126॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥