श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  12.138.125 
ततस्तस्माद् भयान्मुक्तो दुर्लभं प्राप्य जीवितम्।
बिलस्थं पादपाग्रस्थ: पलितं लोमशोऽब्रवीत्॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
उस महान भय से मुक्त होकर दुर्लभ जीवन को प्राप्त हुए लोमशजी ने वृक्ष की शाखा पर बैठकर बिल के अन्दर बैठे हुए चूहे से कहा-॥125॥
 
Freed from that great fear, and having attained a rare life, Lomash, sitting on the branch of the tree, said to the mouse sitting inside the hole -॥ 125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)