श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 123-124
 
 
श्लोक  12.138.123-124 
उन्माथमप्यथादाय चाण्डालो वीक्ष्य सर्वश:॥ १२३॥
विहताश: क्षणेनास्ते तस्माद् देशादपाक्रमत्।
जगाम स स्वभवनं चाण्डालो भरतर्षभ॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! चाण्डाल ने जाल लेकर उसे सब ओर से देखा और निराश होकर क्षण भर में ही उस स्थान को छोड़कर अपने घर चला गया॥123-124॥
 
O best of the Bharatas! The Chandala took the net and looked at it from all sides, and being disheartened, he left that place in a moment and went back to his home.॥ 123-124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)