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mahabharat 12.138.121-123h: तत्पश्चात् चूहे ने बिल्ली की जंजीर काट दी। जाल से मुक्त होते ही बिल्ली उसी वृक्ष पर चढ़ गई। उस भयंकर शत्रु और महान भय से छुटकारा पाकर पलिता अपने बिल में घुस गई और उस रोएँदार वृक्ष की शाखा पर बैठ गई। 121-122 1/2।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 121-123h
 
 
श्लोक  12.138.121-123h 
ततश्चिच्छेद तं पाशं मार्जारस्य च मूषिक:॥ १२१॥
विप्रमुक्तोऽथ मार्जारस्तमेवाभ्यपतद् द्रुमम्।
स तस्मात् सम्भ्रमावर्तान्मुक्तो घोरेण शत्रुणा॥ १२२॥
बिलं विवेश पलित: शाखां लेभे स लोमश:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् चूहे ने बिल्ली की जंजीर काट दी। जाल से मुक्त होते ही बिल्ली उसी वृक्ष पर चढ़ गई। उस भयंकर शत्रु और महान भय से छुटकारा पाकर पलिता अपने बिल में घुस गई और उस रोएँदार वृक्ष की शाखा पर बैठ गई। 121-122 1/2।
 
Thereafter the mouse cut the cat's chain. As soon as it was freed from the net, the cat climbed the same tree. After getting rid of that terrible enemy and that great fear, Palita entered his hole and sat on the branch of the hairy tree. 121-122 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)