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mahabharat 12.138.119-120h: वे दोनों बलवान और बुद्धिमान थे। वे चूहे पर घात लगाने के लिए पास ही बैठे थे; किन्तु सुसंगठित होने के कारण वे चूहे और बिल्ली पर बलपूर्वक आक्रमण नहीं कर पाए।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 119-120h
 
 
श्लोक  12.138.119-120h 
बलिनौ मतिमन्तौ च संघाते चाप्युपागतौ॥ ११९॥
अशक्तौ सुनयात् तस्मात् सम्प्रधर्षयितुं बलात्।
 
 
अनुवाद
वे दोनों बलवान और बुद्धिमान थे। वे चूहे पर घात लगाने के लिए पास ही बैठे थे; किन्तु सुसंगठित होने के कारण वे चूहे और बिल्ली पर बलपूर्वक आक्रमण नहीं कर पाए।
 
Both of them were strong and intelligent. They were sitting nearby to ambush the mouse; but due to being well organized they were not able to attack the mouse and the cat forcefully. 119 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)