श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 117-118h
 
 
श्लोक  12.138.117-118h 
तं दृष्ट्वा यमदूताभं मार्जारस्त्रस्तचेतन:॥ ११७॥
उवाच वचनं भीत: किमिदानीं करिष्यसि।
 
 
अनुवाद
मृत्यु के दूत के समान एक चाण्डाल को आते देख बिल्ली का मन भय से भर गया। वह भयभीत होकर बोला - 'भाई चूहे! अब तुम क्या करोगे?'॥117 1/2॥
 
Seeing a Chandala approaching like a messenger of death, the cat's mind was filled with fear. He said in fear - 'Brother mouse! What will you do now?'॥ 117 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)