श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 111-112h
 
 
श्लोक  12.138.111-112h 
न च कश्चित् कृते कार्ये कर्तारं समवेक्षते॥ १११॥
तस्मात् सर्वाणि कार्याणि सावशेषाणि कारयेत् ।
 
 
अनुवाद
‘कार्य पूरा हो जाने पर न तो कोई उसे करनेवाले की ओर देखता है और न ही उसके कल्याण की ओर ध्यान देता है; इसलिए सभी कार्यों को अधूरा ही छोड़ देना चाहिए।॥111 1/2॥
 
‘After the work is completed, no one looks at the person who did it or pays any attention to his welfare; hence all works must be left incomplete.॥ 111 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)