श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  12.138.109 
कृत्वा बलवता संधिमात्मानं यो न रक्षति।
अपथ्यमिव तद् भुक्तं तस्य नार्थाय कल्पते॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति बलवानों के साथ मेल-मिलाप नहीं करता और अपनी रक्षा का ध्यान नहीं रखता, उसका संग अस्वास्थ्यकर भोजन करने के समान अशुभ है ॥109॥
 
'The association of a person who does not make peace with the strong and takes care of his own safety is as inauspicious as eating unhealthy food.॥ 109॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)