श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  12.138.103 
तथा हि त्वरमाणेन त्वया कार्यं हितं मम।
यत्नं कुरु महाप्राज्ञ यथा रक्षाऽऽवयोर्भवेत् ॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार आप भी मेरे कल्याण के लिए शीघ्र ही कुछ करें । महामुनि ! आप ऐसा प्रयत्न करें कि हम दोनों की रक्षा हो सके । 103॥
 
'Similarly, you should also do something for my welfare soon. Great sage! You make such an effort that both of us can be protected. 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)