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mahabharat 12.138.101: लोमश जी को अपना कार्य शीघ्रता से पूरा करने की जल्दी थी, इसलिए वे अत्यन्त विनम्रता से व्यवहार करते हुए विलम्ब करने वाले चूहे से इस प्रकार कहने लगे -   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  12.138.101 
अथात्मकृत्ये त्वरित: सम्यक् प्रश्रितमाचरन्।
उवाच लोमशो वाक्यं मूषिकं चिरकारिणम्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
लोमश जी को अपना कार्य शीघ्रता से पूरा करने की जल्दी थी, इसलिए वे अत्यन्त विनम्रता से व्यवहार करते हुए विलम्ब करने वाले चूहे से इस प्रकार कहने लगे -
 
Lomash was in a hurry to complete his work; therefore, behaving very politely, he started speaking to the delaying mouse in this manner -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)