vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
»
श्लोक 101
श्लोक
12.138.101
अथात्मकृत्ये त्वरित: सम्यक् प्रश्रितमाचरन्।
उवाच लोमशो वाक्यं मूषिकं चिरकारिणम्॥ १०१॥
अनुवाद
लोमश जी को अपना कार्य शीघ्रता से पूरा करने की जल्दी थी, इसलिए वे अत्यन्त विनम्रता से व्यवहार करते हुए विलम्ब करने वाले चूहे से इस प्रकार कहने लगे -
Lomash was in a hurry to complete his work; therefore, behaving very politely, he started speaking to the delaying mouse in this manner -
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×