श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  12.138.100 
एवमुक्तस्तु मार्जारो मूषिकेणात्मनो हितम्।
वचनं वाक्यतत्त्वज्ञो जीवितार्थी महामति:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
जब चूहे ने ऐसा कहा, तब अत्यंत बुद्धिमान बिल्ली ने वचनों का मर्म समझकर और अपने प्राण बचाने की इच्छा से अपने हित के लिए कहा ॥100॥
 
When the mouse said this, the extremely intelligent cat, understanding the essence of the words and wanting to save his life, spoke for his own benefit. ॥100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)