श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.137.4 
तत्रैको दीर्घकालज्ञ उत्पन्नप्रतिभोऽपर:।
दीर्घसूत्रश्च तत्रैकस्त्रयाणां सहचारिणाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन तीन साथियों में से एक तो (अप्रत्याशित विधाता था, जो) दीर्घकाल के भविष्य के विषय में सोचता था। दूसरा तीव्र बुद्धि वाला था, जिसकी प्रतिभा ठीक समय पर कार्य सिद्ध कर देती थी और तीसरा दीर्घसूत्र था (जो प्रत्येक कार्य में अनावश्यक विलम्ब करता था)।॥4॥
 
There, out of those three companions, one was (the unforeseen creator, who) used to think about the long term future. The second was quick-witted, whose talent used to give the work at the right time and the third was a dirghsutra (who used to unnecessarily delay every task).॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)