Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.137.24: जो मनुष्य सोच-समझकर और विचारपूर्वक काम करता है तथा निरन्तर सतर्क रहता है, वह इच्छित स्थान और समय का उचित उपयोग करता है और उनकी सहायता से इच्छित फल प्राप्त करता है ॥24॥ | mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परीक्ष्यकारी युक्तश्च स सम्यगुपपादयेत्।
देशकालावभिप्रेतौ ताभ्यां फलमवाप्नुयात्॥ २४॥
अनुवाद
जो मनुष्य सोच-समझकर और विचारपूर्वक काम करता है तथा निरन्तर सतर्क रहता है, वह इच्छित स्थान और समय का उचित उपयोग करता है और उनकी सहायता से इच्छित फल प्राप्त करता है ॥24॥
A man who works deliberately and thoughtfully and remains constantly alert, makes proper use of the desired place and time and with their help, gets the desired result. ॥ 24॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि शाकुलोपाख्याने सप्तत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें शाकुलोपाख्यानविषयक एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥