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mahabharat 12.137.20: जो संकट आने से पहले ही अपने बचाव का उपाय कर लेता है, वह 'अज्ञात देव' है और जो सही समय पर अपने बचाव का उपाय खोज लेता है, वह 'तीव्र बुद्धि' है - दोनों ही सुखपूर्वक उन्नति करते हैं; किन्तु जो 'दीर्घसूत्री' व्यक्ति प्रत्येक कार्य में अनावश्यक विलम्ब करता है, वह नष्ट हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.137.20 
अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिश्च य:।
द्वावेव सुखमेधेते दीर्घसूत्रो विनश्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो संकट आने से पहले ही अपने बचाव का उपाय कर लेता है, वह 'अज्ञात देव' है और जो सही समय पर अपने बचाव का उपाय खोज लेता है, वह 'तीव्र बुद्धि' है - दोनों ही सुखपूर्वक उन्नति करते हैं; किन्तु जो 'दीर्घसूत्री' व्यक्ति प्रत्येक कार्य में अनावश्यक विलम्ब करता है, वह नष्ट हो जाता है।
 
He who takes measures to save himself before a crisis comes is the 'unknown God' and he who finds a way to save himself at the right time is the 'quick-witted' - both of them progress happily; but the 'long-winded' person who unnecessarily delays every task gets destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)