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mahabharat 12.137.17: परन्तु मूर्ख और आलसी दीर्घसूरी अचेत होकर मर गया, जैसे इन्द्रियों के नष्ट हो जाने पर मनुष्य नष्ट हो जाता है ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.137.17 
दीर्घसूत्रस्तु मन्दात्मा हीनबुद्धिरचेतन:।
मरणं प्राप्तवान् मूढो यथैवोपहतेन्द्रिय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मूर्ख और आलसी दीर्घसूरी अचेत होकर मर गया, जैसे इन्द्रियों के नष्ट हो जाने पर मनुष्य नष्ट हो जाता है ॥17॥
 
But the foolish and indolent Dirghsūrī died unconscious, just as one perishes when the senses are destroyed. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)