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mahabharat 12.137.11: यह सुनकर परम बुद्धिमान् और दूरदर्शी (अनागत-वीताध) वहाँ से चला गया और एक नाले से होकर दूसरे गहरे जलाशय में चला गया॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.137.11 
एवं श्रुत्वा निराक्रम्य दीर्घदर्शी महामति:।
जगाम स्रोतसा तेन गम्भीरं सलिलाशयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर परम बुद्धिमान् और दूरदर्शी (अनागत-वीताध) वहाँ से चला गया और एक नाले से होकर दूसरे गहरे जलाशय में चला गया॥11॥
 
Hearing this, the most intelligent and visionary (Anagata-Vitadha) left from there and went through a drain to another deep reservoir. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)