श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.137.1 
भीष्म उवाच
अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिश्च य:।
द्वावेव सुखमेधेते दीर्घसूत्री विनश्यति॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! जो संकट आने से पहले ही अपनी रक्षा का उपाय कर लेता है, उसे अनागत विधाता कहते हैं और जो उचित समय पर अपनी रक्षा का उपाय खोज लेता है, उसे प्रत्युत्पन्नमति कहते हैं। ये दोनों प्रकार के मनुष्य सुखपूर्वक उन्नति करते हैं; किन्तु जो प्रत्येक कार्य में अनावश्यक विलम्ब करता है, वह टालमटोल करने वाला मनुष्य नष्ट हो जाता है॥1॥
 
Bhishmaji says- Yudhishthira! The one who takes measures to save himself before the crisis comes is called Anagat Vidhaata and the one who finds the way to save himself at the right time is called Pratyutpannamati. These two types of people progress happily; but the one who unnecessarily delays every task, that procrastinating person gets destroyed.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)