Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.136.4-6: राजा! जो औषधियाँ या वृक्ष खाने योग्य नहीं हैं, उन्हें काटकर लोग उनसे खाने योग्य जड़ी-बूटियाँ पकाते हैं। इसी प्रकार, धर्मज्ञों ने कहा है कि जो व्यक्ति देवताओं, पितरों और मनुष्यों का तर्पण नहीं करता, उसका धन व्यर्थ है। अतः धर्मात्मा राजा को चाहिए कि वह ऐसे धन को जब्त करके उससे अपनी प्रजा का पालन करे, किन्तु राजा को ऐसे धन से अपना कोष नहीं भरना चाहिए। 4-6 | mahabharat अध्याय 12.136: राजा किसका धन ले और किसका न ले तथा किसके साथ कैसा बर्ताव करे—इसका विचार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभोग्याश्चौषधीश्छित्त्वा भोग्या एव पचन्त्युत॥ ४॥
यो वै न देवान् न पितॄन् न मर्त्यान् हविषार्चति।
अनर्थकं धनं तत्र प्राहुर्धर्मविदो जना:॥ ५॥
हरेत् तद् द्रविणं राजन् धार्मिक: पृथिवीपति:।
तत: प्रीणयते लोकं न कोशं तद्विधं नृप:॥ ६॥
अनुवाद
राजा! जो औषधियाँ या वृक्ष खाने योग्य नहीं हैं, उन्हें काटकर लोग उनसे खाने योग्य जड़ी-बूटियाँ पकाते हैं। इसी प्रकार, धर्मज्ञों ने कहा है कि जो व्यक्ति देवताओं, पितरों और मनुष्यों का तर्पण नहीं करता, उसका धन व्यर्थ है। अतः धर्मात्मा राजा को चाहिए कि वह ऐसे धन को जब्त करके उससे अपनी प्रजा का पालन करे, किन्तु राजा को ऐसे धन से अपना कोष नहीं भरना चाहिए। 4-6
King! By cutting those medicinal herbs or trees which are not edible, people cook edible herbs from them. Similarly, the religious men have said that the wealth of a person who does not worship the gods, ancestors and humans with offerings is useless. Therefore, a righteous king should seize such wealth and take care of his subjects with it, but the king should not fill his treasury with such wealth. 4-6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥