Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.136.2: राजा को यज्ञ करने वाले द्विजों से धन नहीं लेना चाहिए। इसी प्रकार उसे दैवी संपत्ति का भी स्पर्श नहीं करना चाहिए। वह लुटेरों और आलसी लोगों का धन चुरा सकता है। 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.136: राजा किसका धन ले और किसका न ले तथा किसके साथ कैसा बर्ताव करे—इसका विचार   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 136: राजा किसका धन ले और किसका न ले तथा किसके साथ कैसा बर्ताव करे—इसका विचार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.136.2 
न धनं यज्ञशीलानां हार्यं देवस्वमेव च।
दस्यूनां निष्क्रियाणां च क्षत्रियो हर्तुमर्हति॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा को यज्ञ करने वाले द्विजों से धन नहीं लेना चाहिए। इसी प्रकार उसे दैवी संपत्ति का भी स्पर्श नहीं करना चाहिए। वह लुटेरों और आलसी लोगों का धन चुरा सकता है। 2॥
 
The king should not take money from the dwijas who perform yagya rituals. Similarly, he should not touch the divine property also. He can steal the wealth of robbers and indolent people. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)