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mahabharat 12.135.1: भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! जो डाकू मरणोपरांत मरणोपरांत अधम गति को प्राप्त नहीं होता। इस विषय में विद्वान पुरुष प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.135: मर्यादाका पालन करने-करानेवाले कायव्यनामक दस्युकी सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.135.1 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
यथा दस्यु: समर्याद: प्रेत्यभावे न नश्यति॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! जो डाकू मरणोपरांत मरणोपरांत अधम गति को प्राप्त नहीं होता। इस विषय में विद्वान पुरुष प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं॥1॥
 
Bhishmaji says - Yudhishthira! The bandit (robber) who follows the code of conduct does not fall into a bad state after death. In this matter, learned men give the example of an ancient history.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)