Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.134.9: जो अपनी शक्ति खो चुका है और दुष्ट है, उसे जब खतरा महसूस होता है तो कोई रक्षक नहीं मिलता। सभी लोग कमज़ोर लोगों के लिए उसी तरह चिंतित हो जाते हैं जैसे भेड़ियों के लिए।   |   mahabharat अध्याय 12.134: बलकी महत्ता और पापसे छूटनेका प्रायश्चित्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 134: बलकी महत्ता और पापसे छूटनेका प्रायश्चित्त  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.134.9 
दुराचार: क्षीणबल: परित्राणं न गच्छति।
अथ तस्मादुद्विजते सर्वो लोको वृकादिव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो अपनी शक्ति खो चुका है और दुष्ट है, उसे जब खतरा महसूस होता है तो कोई रक्षक नहीं मिलता। सभी लोग कमज़ोर लोगों के लिए उसी तरह चिंतित हो जाते हैं जैसे भेड़ियों के लिए।
 
One who has lost his strength and is wicked does not find any protector when he is threatened. Everyone becomes anxious about the weak as they are about wolves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)