श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 134: बलकी महत्ता और पापसे छूटनेका प्रायश्चित्त  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.134.5 
बह्वपथ्यं बलवति न किंचित् क्रियते भयात्।
उभौ सत्याधिकारस्थौ त्रायेते महतो भयात्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
बलवान पुरुष में यदि बहुत-सी बुराई भी हो, तो भी भय के कारण कोई उसके विषय में कुछ नहीं कहता। यदि बल और धर्म दोनों सत्य पर प्रतिष्ठित हों, तो वे मनुष्य को महान भय से बचा लेते हैं। 5॥
 
Even if there is a lot of evil in a strong man, no one says anything about him out of fear. If both force and religion are established over truth, then they protect man from great fear. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)